मातुल कंस
मातुल कंसयमुना तट पर नगरी पावन।मथुरा जिसका नाम सुहावन।।कंस नाम का राजा आया।जनता को वह खूब सताया।।''भगिनी-सुत ही काल बनेगा।तेरे आगे वही ठनेगा।।पुत्र आठवाँ जो आएगा।तेरी मृत्यु संग लाएगा।।''आयी थी नभ से...
View Articleअंबष्ठ कायस्थ का इतिहास
अंबष्ठ कायस्थ का इतिहासजय श्री चित्रगुप्त जी महाराज 🙏प्राचीन हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, कायस्थों की उत्पत्ति चित्रगुप्त जी से हुई है। अंबष्ठ कायस्थों की एक उप-जाति है, जो मुख्य रूप से भारत के हिंदी...
View Articleनमामि मातृभूमि हे !
नमामि मातृ भूमि हे! नमामि भारतीयता।नमामि सैन्य शक्ति हे ! नमामि वीर वीरता।।वसुंधरा निहाल है, हवा सुगंध दे रही।अनाज की बहार है, नदी प्रबंध दे रही।विभावरी खिली रही, शशांक भी रहा खिला।स्वतंत्रता मना...
View Articleसरस्वती वंदना
सरस्वती वंदनाविद्या की देवी हे श्वेतवर्णा ।सबके हृदय में प्रवेश करनाआखर की माला तुमने सजाईपन्नों पर उसको लेकर उतरनाविद्या की देवी हे श्वेतवर्णामिले ज्ञान-मोती सबको ही जग मेंकदमों के नीचे हों फूल मग...
View Articleजिस धरती ने पाला पोसा
🌱पर्यावरण दिवस पर🌱जिस धरती ने पाला पोसाउसका हम सम्मान करेंफसलों की उर्वर माटी परखड़ा न कोई मकान करें।जल से है पृथ्वी पर जीवनहरदम इसका ध्यान धरेंडिटर्जेंट डाल डाल सरि कोकभी न लहूलुहान करें।प्राणवायु...
View Articleकृष्ण कन्हैया माधव प्यारे
सोलह चंद्र-कला को धारेकृष्ण कन्हैया माधव प्यारे।भाद्र कृष्ण का था अँधियाराकिलकारी से गूँजा कारा।वासुदेव तन्द्रा से जागेपल में वह मथुरा को त्यागे।चपल दामिनी चमक रही थीयमुना की धारा तेज बही थी।शेषनाग ने...
View Articleइच्छा मृत्यु
उधेड़बुन"जब से न्यायालय का निर्णय आया हैमन पर उधेड़बुन का गहरा साया हैयह उधेड़बुन निर्णय पर नहीं,नाम पर है क्योंकि नाम है 'इच्छा मृत्यु'""मगर नाम पर उधेड़बुन कैसा है? ""मरने वाला अपनी इच्छा व्यक्त नहीं...
View Articleमिट्टी की खुशबू
मिट्टी की खुशबू और हमजिस मिट्टी की तिलक लगानेहम नीचे झुक जाते हैंवह चंदन कण बन माथे परभारत का मान बढ़ाते हैंबारिश की वह प्रथम बूंद हैजो मिट्टी को महकाती हैसोंधी सोंधी खुशबू देकरपकौडों को ललचाती हैमन...
View Articleआया बसंत
बासंती हाइकु1खिले जलजपवन मलयजआया बसंत।2पीत परागऋतुराज का पागहै अनुराग।3मंद पवनअनुरागी छुअनबासन्ती मन।4विरही मनकहाँ पाए बसंतरंग बेरंग।5वाणी की वीणामंद मंद रागिनीखोया है मन।6सरसों फूलपीले परिधान मेंसजती...
View Articleभारत वंदना
माटी के कण-कण में देखो, हुआ सुवासित चंदन।गर्वित हो अपने भारत का, करते हैं हम वंदन।।उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम, सुंदर सभी दिशाएँ।अरुणोदय या हो अस्ताचल, दृश्य मनोहर लाएँ।।जहाँ खड़ा है अटल हिमालय, गङ्गा...
View Articleकोदंड
उत्कृष्ट पत्रिका अनुभूति के कोदंड विशेषांक में प्रकाशितशक्ति का प्रतीक कोदंड मर्यादा संग शक्ति का प्रतीक बना कोदंडदेख अविनय के भाव कोहोता रहा प्रचंडरघुनन्दन के तरकश में अस्त्र यह कड़े बाँस काप्रत्यंचा...
View Articleऋषि मुनि और उनका आध्यात्म
*'ऋषि मुनि और उनका आध्यात्म'*इस विषय के अंतर्गत सर्वप्रथम हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि आध्यात्म क्या है और ऋषि, मुनि, संत एवं महर्षि में मूलभूत अंतर क्या है एवं मानव कल्याण में उनकी आध्यात्मिक...
View Articleकलम
रचनाकार - ऋता शेखर 'मधु' विधा - नवगीतविषय - कलम, लेखनीचिंतन की भीड़ से पन्नों को आसकलम की सड़क पर शब्द चले खासपरिश्रम के पेड़ पर मीठे लगे फलस्याही की बूँद से हुलस गए पलखबरों में शब्दों की हो रही हलचलबधाई...
View Articleपरिधान
परिधानसभ्यता उन्नत हुई, तब आया परिधान।पहनावा भी है नियत, है इनका भी स्थान।।लहँगा चुन्नी साड़ियाँ, दुल्हन का परिधान।मंडप पर होता नहीं, जींस टॉप में दान।।पूजाघर में सोच लो, बिकनी का क्या काम।सूट साड़ी...
View Articleगौरवशाली भारत
गौरवशाली भारत देशदोहे...यहाँ सनातन सभ्यता, यहाँ अनूठा प्यार।मेरे भारत देश में, मिलता सद्व्यवहार।।संस्कृति या अध्यात्म में, सदा रहा अनमोल।कत्थक गरबा डांडिया, तबला हो या ढोल।।हड़प्पा मोहनजोदड़ो, कहता है...
View Articleअंधेरों का सफर- हाइकु संग्रह पर पाठकीय प्रतिक्रिया
पुस्तक - अंधेरों का सफर ( वृद्धावस्था पर केंद्रित हाइकु)पृष्ठ - 111मूल्य - 320.00 रुपयेप्रकाशक - अयन प्रकाशन, नई दिल्ली - 110059, मोबाइल - 9911313272----------------------------*पाठकीय...
View Articleतटस्थता अस्तु
तटस्थता क्या है ?कहीं बुद्धिमानीकहीं है स्वार्थकहीं चालाकीकहीं परमार्थकहीं निष्क्रियकहीं उदासीनकहीं कुटिलकहीं पदासीनकहीं समझौताकहीं समर्पणकहीं उपेक्षाकहीं है दर्पणकहीं समस्याकहीं समाधानकहीं मूढ़ताकहीं...
View Articleपाँच लघुकथाएँ - ऋता शेखर
1. असर कहाँ तक"मीना अब बड़ी हो गई है। उच्च शिक्षा लेने के बाद नौकरी भी करने लगी है। कोई ढंग का लड़का मिल जाये तो उसके हाथ पीले कर दें !"चाय पीते हुए सरला ने पति से कहा। "हाँ, बेटी के पिता को दिल पर...
View Articleमध्य में क्या
जिंदगी की स्लेट परजन्म या मृत्यु लिखनाआरम्भ और अंत है।क्या इतना ही जीवन है?नहीं...मध्य वृहद उपन्यास है।जन्म तो संयोग हैमृत्यु एक वियोग हैक्या इतना ही जीवन है?नहीं...मध्य मिलन का पर्याय है।जन्म एक भोर...
View Articleडमरू घनाक्षरी
डमरू घनाक्षरी - शृंगार रसवर्णिक छंद- 8, 8, 8, 8 की एक पंक्तिहर अठकल अमात्रिक - त्रिकल त्रिकल द्विकल सेचार समतुकांत पंक्तियाँअनत जगत यह, सरल सहज वह,करत नयन नत, मदन भजन रत।1कमल नयन लख, चरण शरण रख,असत गरल...
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